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स्कूल नामांकन प्रतिशत में गिरावट 2025 तक जारी रहेगा; एनसीईआरटी की रिपोर्ट का अनुमान

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की ‘प्रोजेक्शन एंड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट ने भविष्यवाणी की है कि 2011 में शुरू हुई देश भर में स्कूल नामांकन में गिरावट 2025 तक जारी रहेगी।

एनसीईआरटी ने 1950 से रुझानों की सूचना दी है। 1950 में देश में 2 हजार 171 स्कूल और 2.30 करोड़ छात्र थे। देश में प्राथमिक विद्यालयों का स्तर 2011 तक बढ़ रहा था। हालांकि, 2011 से घटती नामांकन दर 2025 तक जारी रहने की संभावना है। 2011 और 2025 के बीच स्कूल नामांकन में 14.37 प्रतिशत की गिरावट की संभावना है। एनसीईआरटी के शिक्षा सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 13.28 फीसदी लड़के और 15.54 फीसदी लड़कियां हैं।

1950 और 2016 के बीच देश भर में कक्षा 1 से कक्षा 10 तक नामांकन में लगभग 900 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें लड़कियों का नामांकन तेजी से बढ़ा, यानी लगभग एक हजार प्रतिशत। उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर नामांकन में क्रमशः 2016 और 2019 में गिरावट शुरू हुई। 2016 में उच्च प्राथमिक स्तर पर लड़कों, लड़कियों और समग्र नामांकन में गिरावट शुरू हुई। इस दौरान दाखिले में करीब 9.47 फीसदी की गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें 8.7 फीसदी लड़के हैं, जबकि 10.94 फीसदी लड़कियां हैं। स्कूल नामांकन जनसंख्या से संबंधित एक कारक है। इसलिए, यदि संबंधित आयु वर्ग में जनसंख्या घटती है, तो यह पहुंच को प्रभावित करती है। 1991 की जनगणना की तुलना में, शून्य से छह आयु वर्ग का अनुपात 2011 की जनगणना में 18 प्रतिशत से घटकर 13.12 प्रतिशत हो गया।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार स्कूलों में पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने से लड़कियों के नामांकन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। साथ ही, रिपोर्ट में जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (1994), मध्याह्न भोजन योजना (1995), सर्व शिक्षा अभियान (2001) और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (2010) का प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पर मुख्य रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

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