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साल की पहली छमाही में भंडारण सेगमेंट में पीई निवेश 92% घटा, एक साल पहले के 9,300 करोड़ रुपए से घटकर महज 750 करोड़ पर आया

औद्योगिक और भंडारण स्थल परियोजनाओं में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश इस साल के पहले छह महीने में 92 फीसदी घटकर 10.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 750 करोड़ रुपये पर आ गया। इसका कारण यह है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। परामर्श सेवा कंपनी कोलियर्स इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में निवेश और लीज का बाजार अगले साल भी मंद रहने की आशंका है, क्योंकि महामारी के कारण निवेशक तेजी से निर्णय नहीं ले हैं। हालांकि लंबी अवधि में इस क्षेत्र की संभावनाएं आशाजनक बनी हुई हैं।

2017 के बाद से इस क्षेत्र में 27,800 करोड़ रुपए का निवेश आया है

कोलियर्स इंटरनेशन के आंकड़ों के अनुसार, भारत के औद्योगिक और भंडारण स्थल सेक्टर में पीई निवेश जनवरी से जून के दौरान सालभर पहले के 125 करोड़ डॉलर यानी, करीब 9,300 करोड़ रुपए से घटकर महज 10.2 करोड़ डॉलर पर आ गया। रिपोर्ट में कहा गया कि 2017 के बाद से इस क्षेत्र ने 27,800 करोड़ रुपए (3.7 अरब डॉलर) के निवेश को आकर्षित किया है। वर्ष 2017 से जनवरी-जून 2020के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र के कुल पीई निवेश का 17 फीसदी इस क्षेत्र में आया।

भंडारण क्षेत्र पहले बिखरे शेड और गोदामों के रूप में था

कंपनी ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों के कारण 2017 के बाद से औद्योगिक और भंडारण क्षेत्र ने महत्वपूर्ण निवेशकों को आकर्षित किया है। इन सुधारों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ध्यान देना, लॉजिस्टिक्स (रसद) पार्क नीति का निर्माण और मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर जैसे कदम शामिल हैं। कोलियर्स ने कहा कि भंडारण क्षेत्र पहले बिखरे शेड और गोदामों के रूप में था।

पीई निवेश में भंडारण व औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 2017 के बाद से लगातार बढ़ी है

अब सरकारी नीतियों से प्रभावित होकर यह क्षेत्र संगठित हो रहा है। पुनर्गठित क्षेत्र की वृद्धि की संभावनाओं के दम पर इस क्षेत्र ने निवेशकों का महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया है। इस कारण कुल निजी इक्विटी निवेश में भंडारण व औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी साल 2017 के बाद से ही लगातार बढ़ती जा रही है।

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कोरोनावायरस महामारी के कारण निवेशक तेजी से फैसला नहीं ले पा रहे हैं, इसलिए इस क्षेत्र को अगले साल भी कम निवेश मिलने की आशंका है

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