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अमेरिका में बिगड़े हालात, ट्रंप को बुलानी पड़ी सेना…

अमेरिका में एक अश्‍वेत की मौत के बाद हालात इतने ज्‍यादा बिगड़ गए हैं कि राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को वाशिंगटन डीसी में सेना बुलानी पड़ी। यहां हो रहे हिंसक प्रदर्शनकी आग अब 40 शहरों तक पहुंच गई है। अमेरिका में हिंसा की शुरुआत जॉर्ज फ्लॉयड नाम के अश्वेत शख्स की मौत के बाद मिनियापोलिस से हुई, जॉर्ज की मौत के पीछे पुलिस सिस्टम को जिम्मेदार माना जा रहा है।

आरोप है कि एक पुलिसकर्मी की थर्ड डिग्री के कारण जॉर्ज की मौत हुई। आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है, लेकिन अश्वेत समुदाय के लोग आरोपियों पर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग रहे हैं। हिंसा की लपटें राजधानी वॉशिंगटन डीसी और वाइट हाउस (Riots near White House) तक पहुंच चुकी हैं। हालात नियंत्रण से बाहर निकलते देख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump on US Riots) ने अमेरिकी मिलिट्री (US Military) को उतारने का फैसला किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ‘जॉर्ज फ्लॉयड की निर्मम हत्या से सभी अमेरिकी दुखी हैं और उनके मन में एक आक्रोश है। जॉर्ज और उनके परिवार को इंसाफ दिलाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन की ओर से उन्हें पूरा न्याय मिलेगा। मगर देश के राष्ट्रपति के तौर पर मेरी पहली प्राथमिकता इस महान देश और इसके नागरिकों के हितों की रक्षा करना है।’ उन्होंने कहा, ‘रविवार रात वॉशिंगटन डीसी में जो कुछ हुआ वह बेहद गलत है। मैं हजारों की संख्या में हथियारों से लैस सेना के जवानों को उतार रहा हूं। इनका काम दंगा, आगजनी, लूट और मासूम लोगों पर हमले की घटनाओं पर लगाम लगाना होगा।’

लोग लूट रहे हैं दुकान
अमेरिकियों का गुस्सा सबसे पहले मिनियापोलिस शहर पर फूटा। यहां 26 मई 2020 को सैकड़ों लोगों ने उसी कप फूड नाम के स्टोर के सामने एकजुट होकर विरोध-प्रदर्शन किया, जहां पुलिस कस्टडी में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत हुई थी। इसके बाद ये आग तेजी से फैली और मिनियापोलिस में कई और जगहों पर भी प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने शहर में कई जगहों पर आगजनी की। कारों, दुकानों और औद्योगिक संस्थानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और रबड़ की गोलियां चलाई गईं। दंगों के बीच मिनिपोलिस में कई जगहों पर सुपर मार्केट्स में लूटपाट भी हुई। दंगाइयों ने दुकानों में तोड़फोड़ करके वहां पर रखा सामान लूट लिया। सुपरमार्केट्स से लूट का सामान ले जाते लोगों के वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत से अश्वेत समुदाय इतना आहत है कि उसने पुलिसकर्मियों पर भी हमले किए। पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की। मिनियापोलिस शहर के हालत इतने खराब हो गए कि नेशनल गार्ड की तैनाती करनी पड़ी। ये अमेरिका की सेना की वो इकाई है, जिसे वहां पर घरेलू आपातकाल की स्थितियों में ही तैनात किया जाता है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद हिंसा की आग दिन पर दिन तेज़ हो रही है। सिर्फ मिनिपोलिस में ही नहीं बल्कि लुईविल और अटलांटा में भी हिंसा की घटनाएं देखने को मिलीं। लॉस एंजेलिस में भी सड़कों पर आग लगा दी गई। भीड़ ने दुकानों पर हमला बोला, दंगाइयों ने दुकान से सामान लूटा। कुछ प्रदर्शनकारी लूटे हुए सामान को अपनी कारों में भरकर ले जाते हुए भी दिखे।

हालात इतने बुरे हैं कि हिंसा की आग व्हाइट हाउस तक पहुंच गई है। रविवार देर रात भारी संख्या में प्रदर्शनकारी राजधानी वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर इकट्ठा हो गए और पत्थरबाजी की। हर तरफ इमारतों की दीवारों पर स्प्रे करके ‘मैं सांस नहीं ले सकता’ लिख दिया गया। देर रात व्हाइट हाउस के बाहर आगजनी भी की गई और प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए। हालात इतने खराब हो गए कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को परिवार समेत सुरक्षित बंकरों में ले जाया गया, हालांकि अब राष्ट्रपति ट्रंप बंकर में नहीं हैं।

मिनियोपोलिस और वाशिंगटन डीसी के बाद प्रदर्शन की ये आग अमेरिका के दूसरे शहरों में भी तेजी से फैलने लगी। इसने न्यूयॉर्क को भी अपनी चपेट में ले लिया, जहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। दंगाइयों और हिंसक प्रदर्शन करने वालों को रोकने के लिए अमेरिकी पुलिस की ओर से भी लगातार जवाबी कार्रवाई की जा रही है। 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है, लेकिन लोगों का उग्र प्रदर्शन जारी है।

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