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2 महीने से अंधेरे में डूबा गांव, ट्रांसफार्मर चोरी के बाद से अधिकारियों की अनदेखी

जहां एक तरफ केंद्र सरकार द्वारा हर गांव को बिजली से जोड़ने का दावा किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ अजमेर डिस्कॉम के अधिकारीयों अंधेरगर्दी के कारण जनजाति बाहुल बांसवाड़ा जिले का एक गांव गत दो माह से अंधेरे में डूबा हुआ है। विद्युत लाइन होने के बाद भी गांव बिजली सुविधा से महरूम है। केवल इसलिए कि गांव में दो महीने पहले ट्रांसफार्मर चोरी की वारदात हुई थी। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी अजमेर डिस्कॉम ने मामले की सुध नहीं ली। थाने में जाकर खुद FIR कटाने की बजाय इसकी जिम्मेदारी डिस्कॉम के कनिष्ठ अभियंता ने गांव वालों पर थोप दी। ग्रामीण बीते दो महीने से ट्रांसफार्मर चोरी होने की रिपोर्ट लेकर घूम रहे थे। पुलिस मामले में FIR नहीं काट रही है। इधर, बिना FIR के डिस्कॉम नया ट्रांसफार्मर नहीं लगा रहा है। मामला डिस्कॉम के आनंदपुरी सब डिवीजन की डोकर ग्राम पंचायत के मालीपाड़ा गांव का है।

 डिस्कॉम के कनिष्ठ अभियंता इस मामले को लेकर अलग ही तर्क दे रहा है। दरअसल, मालीपाड़ा गांव में 14 सितम्बर की रात को चोर चालू लाइन से 16KVA क्षमता का ट्रांसफार्मर चोरी कर ले गए थे। इसकी सूचना ग्रामीणों ने वहां के कनिष्ठ अभियंता राजेश सुरावत को दी। JEN ने ग्रामीणों को नियम बताया कि बिना FIR के नया ट्रांसफार्मर नहीं लगेगा। लेकिन, खुद आनंदपुरी थाने में जाकर FIR नहीं कटाई। इसके बाद थाने में ग्रामीणों की एप्लीकेशन कुछ दिन पड़ी रही। लगातार त्योहार दिवाली, छोटी दिवाली और प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की यात्रा में पुलिस ने खुद को व्यस्त बताते हुए FIR से टालमटोल की। अब सरपंच के खुद थाने पहुंचने के बाद 9 नवम्बर को पुलिस ने FIR दर्ज की। बता दें कि गांव में करीब 15 से 20 कनेक्शन हैं, जिन लोगों की ओर से नियमित बिल भी जमा कराया जाता है।
डिस्कॉम के नियमों की बात करें तो ट्रांसफार्मर चाेरी वाले मामलों के अलग नियम हैं। नियम के तहत वारदात वाले स्थल की डिस्कॉम के JEN को थाने में FIR देनी होती है। ये FIR डिस्कॉम के ASP (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, विजिलेंस) को फेक्स या दूसरे माध्यम से भेजी जाती है। वहां से अनुमति मिलने के बाद निगम उस स्थान के लिए नए ट्रांसफार्मर की अनुमति जारी करता है।
डोकर ग्राम पंचायत की सरपंच मीरा के प्रतिनिधि ने बताया कि दो महीने से लाइट बंद है, लेकिन डिस्कॉम की ओर से एफआईआर नहीं कराई गई। ग्रामीणों के भरोसे एफआईआर छोड़ दी गई थी। एप्लीकेशन तो थाने में बहुत पहले दे दी थी, लेकिन पुलिस दूसरी ड्यूटी में व्यस्त थी। इसलिए एफआईआर नहीं कटी थी। अब पुलिस ने सुनी है।

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